Thursday, 31 August 2017

*रेशनिंगचे नियम*
रॉकेल/घासलेट पहिल्‍या पंधरवड्यात न घेतल्‍यास महिना अखेरपर्यंत घेता येते. हप्‍ता बुडत नाही.

बीपीएल् व अंत्‍योदयचे धान्‍य गेल्‍या महिन्‍यात न घेतल्‍यास पुढच्‍या महिन्‍यातही घेता येते.

बीपीएल् व अंत्‍योदयचे धान्‍य महिन्‍यात 4 हप्‍त्‍यातही घेता येते.

रेशनवर घेतलेल्‍या वस्‍तूंची पावती मिळालीच पाहिजे. पावतीवर रेशन दुकानाचा क्रमांक असतो.

एका दिवशी एकच पावती फाडता येते असा नियम नाही.

ज्‍या व जेवढ्या वस्‍तू हव्‍या असतील तेवढ्याच वस्‍तू आपण घेऊ शकतो.

 इतर गोष्‍टी घेतल्‍याशिवाय रॉकेल मिळणार नाही असे दुकानदार म्‍हणू शकत नाही.

*रेशनकार्ड स्‍वतःकडे ठेवून घेण्‍याचा किंवा ते रद्द करण्‍याचा अधिकार दुकानदाराला नाही*

रेशन दुकान रोज सकाळी 4 तास व सायंकाळी 4 तास उघडे असलेच पाहिजे.

आठवडी बाजाराच्‍या दिवशी उघडे असले पाहिजे.

आठवड्यातून एकदाच दुकान बंद ठेवता येते.

*रेशन दुकानात लोकांना स्‍पष्‍टपणे वाचता येईल असा महिती फलक असला पाहिजे. या फलकावर दुकानाची वेळ, सुटीचा दिवस, दुकान क्रमांक, तक्रार वही उपलब्‍ध असल्‍याची नोंद, रेशन कार्यालयाचा पत्‍ता व फोन,भाव व देय प्रमाण, उपलब्‍ध कोटा ही माहिती असणे अनिवार्य असते*.

 बीपीएल, अंत्‍योदय व अन्‍नपूर्णा लाभार्थ्‍यांची यादी दुकानात लावलेली असते.

*वरीलपैकी कोणतीही गोष्‍ट आपल्‍या गावातल्‍या रेशनदुकानात होत नसेल, तर ताबडतोब लेखी तक्रार नोंदवा*

*दुकानातच तक्रारवही ठेवलेली असते. ती वही मागा आणि त्‍यात आपली तक्रार लिहून त्‍याखाली नाव, पत्‍ता, सही/अंगठा करा*
 *जर दुकानदाराने ही वही दिली नाही, तर तहसिलदाराकडे वही न देण्‍याची तक्रार करा*

 *तक्रारवही न देणे हा अदखलपात्र गुन्‍हा म्‍हणून तहसिलदार कारवाई करतात*

*तक्रारवहीत पाच तक्रारी नोंदल्‍या, की दुकानदाराला 15 हजार रूपये दंड होतो*

दुकानावर देखरेख करण्‍यासाठी ग्राम पंचायतीची दक्षता समिती असते. या समितीत जागरूक तरुणांनी सहभागी झाले पाहिजे.

ग्रामसभेत या समितीविषयी चर्चा करा. गरज असेल, तर समिती बदला. ही समिती दुकानावर धाड घालू शकते. गैरप्रकार असतील, तर दुकानाला टाळेही लावू शकते. तलाठी या समितीचा सदस्‍य
 सचिव असतो.

*लेखी तक्रार तहसिलदार किंवा रेशन ऑफिसर यांच्‍याकडेही करता येते* 🙏🏻       पुरवठा विभागावर नियंत्रण ठेवण्यासाठी तालुका स्तरावर दक्षता समिति असते या समितिच्या प्रत्येक महिन्याला बैठका घेणे बंधनकारक आहे.       याबाबत आपल्याला कोणतीही अडचण आल्यास आपण                                                                                                -अखिल भारतीय ग्राहक पंचायत अथवा भारतीय जनसंसदच्या कार्यकर्ते यांचे शी सम्पर्क साधून मदत घेऊ शकता.       📲आशिष बोरा IAS

धातू का महत्व

*🍶कौन सी धातु के बर्तन में भोजन करने से क्या क्या लाभ और हानि होती है🍶*

                         *सोना*

सोना एक गर्म धातु है। सोने से बने पात्र में भोजन बनाने और करने से शरीर के आन्तरिक और बाहरी दोनों हिस्से कठोर, बलवान, ताकतवर और मजबूत बनते है और साथ साथ सोना आँखों की रौशनी बढ़ता है।

                        *चाँदी*

चाँदी एक ठंडी धातु है, जो शरीर को आंतरिक ठंडक पहुंचाती है। शरीर को शांत रखती है  इसके पात्र में भोजन बनाने और करने से दिमाग तेज होता है, आँखों स्वस्थ रहती है, आँखों की रौशनी बढती है और इसके अलावा पित्तदोष, कफ और वायुदोष को नियंत्रित रहता है।

                           *कांसा*

काँसे के बर्तन में खाना खाने से बुद्धि तेज होती है, रक्त में  शुद्धता आती है, रक्तपित शांत रहता है और भूख बढ़ाती है। लेकिन काँसे के बर्तन में खट्टी चीजे नहीं परोसनी चाहिए खट्टी चीजे इस धातु से क्रिया करके विषैली हो जाती है जो नुकसान देती है। कांसे के बर्तन में खाना बनाने से केवल ३ प्रतिशत ही पोषक तत्व नष्ट होते हैं।

                         *तांबा*

तांबे के बर्तन में रखा पानी पीने से व्यक्ति रोग मुक्त बनता है, रक्त शुद्ध होता है, स्मरण-शक्ति अच्छी होती है, लीवर संबंधी समस्या दूर होती है, तांबे का पानी शरीर के विषैले तत्वों को खत्म कर देता है इसलिए इस पात्र में रखा पानी स्वास्थ्य के लिए उत्तम होता है. तांबे के बर्तन में दूध नहीं पीना चाहिए इससे शरीर को नुकसान होता है।

                        *पीतल*

पीतल के बर्तन में भोजन पकाने और करने से कृमि रोग, कफ और वायुदोष की बीमारी नहीं होती। पीतल के बर्तन में खाना बनाने से केवल ७ प्रतिशत पोषक तत्व नष्ट होते हैं।

                         *लोहा*

लोहे के बर्तन में बने भोजन खाने से  शरीर  की  शक्ति बढती है, लोह्तत्व शरीर में जरूरी पोषक तत्वों को बढ़ता है। लोहा कई रोग को खत्म करता है, पांडू रोग मिटाता है, शरीर में सूजन और  पीलापन नहीं आने देता, कामला रोग को खत्म करता है, और पीलिया रोग को दूर रखता है. लेकिन लोहे के बर्तन में खाना नहीं खाना चाहिए क्योंकि इसमें खाना खाने से बुद्धि कम होती है और दिमाग का नाश होता है। लोहे के पात्र में दूध पीना अच्छा होता है।

                         *स्टील*

स्टील के बर्तन नुक्सान दायक नहीं होते क्योंकि ये ना ही गर्म से क्रिया करते है और ना ही अम्ल से. इसलिए नुक्सान नहीं होता है. इसमें खाना बनाने और खाने से शरीर को कोई फायदा नहीं पहुँचता तो नुक्सान भी  नहीं पहुँचता।

                      *एलुमिनियम*

एल्युमिनिय बोक्साईट का बना होता है। इसमें बने खाने से शरीर को सिर्फ नुक्सान होता है। यह आयरन और कैल्शियम को सोखता है इसलिए इससे बने पात्र का उपयोग नहीं करना चाहिए। इससे हड्डियां कमजोर होती है. मानसिक बीमारियाँ होती है, लीवर और नर्वस सिस्टम को क्षति पहुंचती है। उसके साथ साथ किडनी फेल होना, टी बी, अस्थमा, दमा, बात रोग, शुगर जैसी गंभीर बीमारियाँ होती है। एलुमिनियम के प्रेशर कूकर से खाना बनाने से 87 प्रतिशत पोषक तत्व खत्म हो जाते हैं।

                           *मिट्टी*

मिट्टी के बर्तनों में खाना पकाने से ऐसे पोषक तत्व मिलते हैं, जो हर बीमारी को शरीर से दूर रखते थे। इस बात को अब आधुनिक विज्ञान भी साबित कर चुका है कि मिट्टी के बर्तनों में खाना बनाने से शरीर के कई तरह के रोग ठीक होते हैं। आयुर्वेद के अनुसार, अगर भोजन को पौष्टिक और स्वादिष्ट बनाना है तो उसे धीरे-धीरे ही पकना चाहिए। भले ही मिट्टी के बर्तनों में खाना बनने में वक़्त थोड़ा ज्यादा लगता है, लेकिन इससे सेहत को पूरा लाभ मिलता है। दूध और दूध से बने उत्पादों के लिए सबसे उपयुक्त हैमिट्टी के बर्तन। मिट्टी के बर्तन में खाना बनाने से पूरे १०० प्रतिशत पोषक तत्व मिलते हैं। और यदि मिट्टी के बर्तन में खाना खाया जाए तो उसका अलग से स्वाद भी आता है।
 🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻